Parshuram Janmotsav 2026: श्री राष्ट्रीय परशुराम सेना संघ, बीकानेर के जिला अध्यक्ष के रूप में मैं, Arjun Panchariya Sindhu, आज यह प्रश्न पूरे प्रशासन और समाज के सामने रखना चाहता हूँ कि जब हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, जब संविधान हर जाति, वर्ग और धर्म को समान अधिकार देता है, तो फिर केवल स्वर्ण समाज के साथ ही यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है?
आज भारत में लगभग हर छोटी-बड़ी जयंती पर सरकारी अवकाश घोषित किए जाते हैं, लेकिन जब बात हमारे आराध्य भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव की आती है, तो उस दिन अवकाश क्यों नहीं दिया जाता? क्या सनातन संस्कृति में उनका कोई महत्व नहीं है? यह सीधा-सीधा हमारी सनातन परंपरा पर प्रहार है और हमारे महापुरुषों का अपमान है।
स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि हमारे देश में उन दिनों पर भी अवकाश घोषित होते हैं जिनका भारत की संस्कृति और परंपरा से कोई सीधा संबंध नहीं है, यहाँ तक कि अंग्रेजों के त्योहारों तक पर छुट्टियाँ दी जाती हैं। फिर ब्राह्मण समाज के साथ ही इतनी बेरुखी और भेदभाव क्यों? जब चुनाव आते हैं, वोट माँगने की बारी आती है, तब ही ब्राह्मण समाज याद आता है, उसके अलावा क्यों नहीं?
मैं बीकानेर जिला प्रशासन और राजस्थान सरकार से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लिया जाए और भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव पर सरकारी अवकाश घोषित किया जाए।
सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma स्वयं ब्राह्मण समाज से आते हैं। यदि उन्हें ही अपने आराध्य देव का महत्व दिखाई नहीं दे रहा, तो फिर बाकी लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है? जब सिक्का खुद का ही खोटा हो, तो दूसरों को दोष देने का कोई मतलब ही नहीं है।
यह केवल एक समाज की बात नहीं है, यह हमारी संस्कृति, हमारे सम्मान और हमारे अस्तित्व का प्रश्न है, और इस पर अब खुलकर बात होनी ही चाहिए।




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