परशुराम सेना से मेरा जुड़ाव किसी पद से शुरू नहीं हुआ था। मैं पहले एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में अपनी इच्छा से संगठन और समाज से जुड़ा हुआ था। मेरे मन में शुरुआत से यही था कि समाज के बीच रहकर पहले उसे समझना जरूरी है—हमारी कमियाँ क्या हैं, युवाओं की सोच क्या है और हम आपस में और बेहतर तरीके से कैसे जुड़ सकते हैं।
बाद में 26 अक्टूबर 2024 को मुझे श्री राष्ट्रीय परशुराम सेना संघ, बीकानेर में युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। मेरे लिए यह केवल एक पद नहीं था, बल्कि जिम्मेदारी बढ़ने का समय था। पद मिलने के बाद भी मेरी सोच यही रही कि केवल नाम या पद रखने से समाज के लिए कुछ नहीं बदलता, उसके लिए जमीन पर लोगों से जुड़ना पड़ता है।
अपने कार्यकाल में मैंने खास तौर पर युवाओं को समाज से जोड़ने, शिक्षा और रोजगार के प्रति जागरूक करने, आपसी एकता और सहयोग की भावना बढ़ाने तथा संगठन को जिला और तहसील स्तर पर मजबूत करने की दिशा में अपनी क्षमता के अनुसार काम किया है। संगठन विस्तार के इसी प्रयास में नोखा तहसील स्तर पर भी संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ आगे बढ़ाई गईं।
समाज के बीच काम करते हुए मैंने यह भी समझा कि केवल समाज की कमियाँ बताना समाधान नहीं है। हमें पहले खुद से शुरुआत करनी होगी। युवाओं को शिक्षा, Skill और रोजगार के प्रति गंभीर होना होगा और साथ ही अपनी संस्कृति तथा सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझना होगा।
मेरे लिए परशुराम सेना में मेरा योगदान किसी एक कार्यक्रम या पद तक सीमित नहीं है। मैं इसे समाज को करीब से समझने, युवाओं से जुड़ने और जहाँ मेरी क्षमता काम आ सके वहाँ अपना योगदान देने की एक लगातार चलने वाली जिम्मेदारी मानता हूँ।
आज भी मेरी कोशिश यही है—पद से ज्यादा काम को महत्व दूँ और समाज के बीच रहकर समाज को समझते हुए जितना मुझसे संभव हो, उतना योगदान देता रहूँ।

