मैं खुद एक युवा हूँ, इसलिए युवाओं को कोई बड़ी सीख देने के बजाय वही बात कहना चाहता हूँ जो मैंने अपनी जिंदगी और अपने आसपास के लोगों को देखकर महसूस की है।
आज हमारे पास अवसरों की कमी नहीं है। मोबाइल हाथ में है, इंटरनेट है, दुनिया की लगभग हर जानकारी कुछ सेकंड में हमारे सामने आ जाती है। लेकिन मेरे हिसाब से आज सबसे बड़ी परेशानी जानकारी की कमी नहीं, बल्कि ध्यान की कमी है। हम एक चीज पर ज्यादा समय तक टिक ही नहीं पाते। आज कुछ करने का मन होता है, कल कुछ और अच्छा दिखाई देता है और परसों हमारा लक्ष्य ही बदल जाता है।
मैंने एक चीज अपने अंदर भी महसूस की है कि जब तक हम खुद यह तय नहीं करेंगे कि हमें जाना कहाँ है, तब तक दुनिया हमें अलग-अलग दिशाओं में खींचती रहेगी।
एक और बात जो मुझे बहुत जरूरी लगती है—अपनी जिंदगी की तुलना हर समय दूसरों से मत करो। सोशल मीडिया पर हमें किसी की नौकरी दिखाई देती है, किसी की गाड़ी, किसी का पैसा और किसी की सफलता। लेकिन उसके पीछे के पाँच-दस साल हमें दिखाई नहीं देते। हम उसकी आज की स्थिति की तुलना अपनी शुरुआत से करके खुद को कमजोर समझने लगते हैं।
हर इंसान का समय अलग होता है।
अगर अभी आपके पास बहुत ज्यादा साधन नहीं हैं, तब भी जो आपके पास है वहीं से शुरुआत करो। छोटी शुरुआत करने में कोई शर्म नहीं है। शर्म इस बात की होनी चाहिए कि क्षमता होते हुए भी हमने केवल सोचते-सोचते समय निकाल दिया।
और एक बात मैं खास तौर पर कहना चाहता हूँ—माता-पिता के संघर्ष को समझो। हम कई बार अपनी जरूरतों और इच्छाओं में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि यह भूल जाते हैं कि हमारे पीछे किसी ने अपनी जिंदगी के कितने साल लगाए हैं। उनकी हर बात सही हो, यह जरूरी नहीं, लेकिन उनके संघर्ष और उनके समय की कीमत समझना जरूर सीखो।
दोस्त बनाओ, घूमो, जिंदगी का आनंद लो—यह सब भी जरूरी है। लेकिन ऐसा भी न हो कि जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण साल केवल मनोरंजन में निकल जाएँ और जब जिम्मेदारियाँ सामने आएँ तब हमें पहली बार भविष्य की चिंता हो।
गलतियाँ भी करो। गलत निर्णय भी हो सकते हैं। मैं खुद भी गलतियाँ करता हूँ और आगे भी होंगी। लेकिन एक गलती को अपनी पहचान मत बना लेना। उससे जो सीखना है सीखो और आगे बढ़ो।
सबसे जरूरी बात, अपने फैसले खुद लेना सीखो। सलाह सबसे लो, लेकिन हर किसी की बात सुनकर अपनी दिशा मत बदलो। दुनिया में आपको रोकने वाले भी मिलेंगे, बिना वजह तारीफ करने वाले भी मिलेंगे और सही रास्ता बताने वाले भी। धीरे-धीरे आपको खुद पहचानना सीखना होगा कि आपके लिए क्या सही है।
अपने माता-पिता का सम्मान रखो, अपने चरित्र को मजबूत रखो, गलत संगत से बचो और ऐसा कोई काम मत करो जिसके लिए बाद में खुद की नजरों में नीचे देखना पड़े।
पैसा कमाना जरूरी है, सफल होना भी अच्छी बात है, लेकिन मेरी नजर में जिंदगी केवल पैसा और पद नहीं है। आप कैसे इंसान बने, आपके कारण कितने लोगों का अच्छा हुआ और मुश्किल समय में आपका चरित्र कैसा रहा—यह भी उतना ही मायने रखता है।
मैं भी अभी अपनी जिंदगी सीखते हुए आगे बढ़ रहा हूँ। इसलिए यह बातें मैं किसी शिक्षक की तरह नहीं, बल्कि आपके ही बीच के एक युवा के रूप में कह रहा हूँ।
अपने जीवन के कुछ साल खुद को बनाने में लगा दो। दुनिया को दिखाने के लिए नहीं, खुद को इस लायक बनाने के लिए कि आने वाले समय में परिस्थितियाँ जैसी भी हों, आपको अपने ऊपर भरोसा रहे।
— अर्जुन पंचारिया सिंधु

